अहोई अष्टमी माता की आरती / Ahoi Ashtami Mata Ki Aarti PDF in Hindi

Ahoi Mata Ji

अहोई अष्टमी व्रत की परम्परा बहुत समय से चली आ रही है। अहोई अष्टमी का व्रत संतान की दीर्घायु के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान को दीघार्यु के साथ – साथ सुख – समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस व्रत करने से अहोई माता शीघ्र ही प्रसन्न होती है।

इस व्रत के परिणामस्वरुप बालक हमेशा स्वस्थ एवं सुरक्षित रहता है। यह व्रत विशेषतः माताएं अपने पुत्र के लिए रखती हैं।  मान्यता ये भी है की जिस स्त्री की शादी हो जाने के बाद भी बहुत समय से संतान की प्राप्ति न हो रही हो और वे इस व्रत का विधिवत पालन करें तो अवश्य ही उन्हें संतान की प्राप्ति हो जाती है।

अहोई अष्टमी के व्रत में पूरे दिन उपवास किया जाता है एवं रात्रिकाल में तारों को करवा से अर्घ्य दिया जाता है तथा बालक के लिए मंगल कामना की जाती है। इसी के बाद इस व्रत को सम्पूर्ण माना जाता है।

कहा जाता है कि अहोई माता के पूजन में अहोई अष्टमी व्रत की कथा पढ़ना भी महत्वपूर्ण है। अहोई माता की कथा पढ़ने के साथ – साथ आरती का भी विशेष महत्त्व है। इसीलिए अहोई माता के पूजन के उपरांत अहोई माता की आरती अवश्य करनी चाहिए।

 

अहोई माता जी की आरती / Ahoi Mata Ki Aarti Lyrics

जय अहोई माता, मइया जय अहोई माता।

तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता॥

जय अहोई माता॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला तू ही है जगमाता।

सूर्य-चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता॥

जय अहोई माता॥

माता रूप निरंजन सुख-सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता॥

जय अहोई माता॥

तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।

कर्म-प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता॥

जय अहोई माता॥

जिस घर तुम्हरो वासा, ताहि घर गुण आता।

कर न सके सोई कर ले, मन नहीं घबराता॥

जय अहोई माता॥

तुम बिन सुख न होवे न कोई पुत्र पाता।

खान-पान का वैभव तुम बिन नहीं आता॥

जय अहोई माता॥

शुभ गुण सुंदर युक्ता, क्षीर निधि की जाता।

रतन चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता॥

जय अहोई माता॥

श्री अहोई मां की आरती जो कोई जन गाता।

उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता॥

जय अहोई माता॥

 

अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड में स्नान का महत्व

अहोई अष्टमी के व्रत के संदर्भ में राधाकुंड में स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।अष्टमी के दिन राधाकुंड में लाखों दंपति स्नान कर संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। मथुरा से करीब 26 किलोमीटर दूर राधा कुंड का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि कार्तिक मास की अष्टमी पर राधाकुंड में स्नान करने वाली सुहागिनों को संतान की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि श्रीराधा जी ने इस कुंड को अपने कंगन से खोदा था, इसी कारण इसे “कंगन कुंड” भी कहा जाता है।
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