अहोई अष्टमी का व्रत संतान की दीर्घायु के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान को दीघार्यु के साथ – साथ ख़ुशी एवं समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस व्रत करने से अहोई माता शीघ्र ही प्रसन्न होती है।

अहोई माता के आशीर्वाद से माताओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अहोई अष्टमी के दिन माता पार्वती की पूजा का भी उतना ही विधान है जितना की अहोई माता का है। अहोई अष्टमी का पर्व दीपावली से 8 दिन पूर्व रखा जाता है। अहोई माता का यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत की महिलाएं रखती हैं।

इस व्रत के प्रभाव से हर माता की संतान बहुत ही स्वस्थ एवं सुरक्षित रहती है। मान्यता ये भी है की जिस स्त्री की शादी हो जाने के बाद भी बहुत समय से संतान की प्ताप्ति न हो रही हो और वे इस व्रत का विधिवत पालन करें तो अवश्य ही उन्हें संतान की प्राप्ति हो जाती है।

 

अहोई अष्टमी व्रत कथा हिंदी / Ahoi Ashtami Ki Kahani in Hindi PDF

पूजा के दौरान साहूकार की कथा को पढ़ना या सुनना अनिवार्य बताया गया है। इस कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक साहूकार के सात बेटे और सात बहुएं थीं। इस साहूकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी। दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं और बेटी मिट्टी लाने जंगल गईं। बेटी जहां मिट्टी काट रही थी उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने सात बेटों से साथ रहती थी।

मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया। स्याहु इस पर क्रोधित होकर बोली कि तुमने मेरे बच्चे को मारा है, अब मैं तुम्हारी कोख बांध दूंगी। स्याहू की बात से डरकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से बचाने की गुहार लगाने लगी और भाभियों से विनती करने लगी कि वे उसकी जगह पर अपनी कोख बंधवा लें। सातों भाभियों में से सबसे छोटी भाभी को अपनी ननद पर तरस आ गया और वो उसने स्याहु से कहा कि आप मेरी कोख बांधकर अपने क्रोध को समाप्त कर सकती हैं।

स्याहु ने उसकी कोख बांध दी। इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे हुए, वे जीवित नहीं बचे. सात दिन बाद उनकी मौत हो जाती थी। इसके बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका उपाय पूछा गया तो पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी। सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और छोटी बहू से पूछती है कि तू किस लिए मेरी इतनी सेवा कर रही है। तब छोटी बहू कहती है कि स्याहु माता ने मेरी कोख बांध दी है जिससे मेरे बच्चे नहीं बचते हैं। आप मेरी कोख खुलवा दें तो आपकी बहुत मेहरबानी होगी।

सेवा से प्रसन्न सुरही छोटी बहु को स्याहु माता के पास ले जाती है। वहां जाते समय रास्ते में दोनों थक कर आराम करने लगते हैं। अचानक साहूकार की छोटी बहू देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है। तभी छोटी बहू सांप को मार देती है. इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और अपने बच्चे को जीवित देखकर प्रसन्न होती है। इसके बाद वो छोटी बहू और सुरही को स्याहु माता के पास पहुंचा देती है। वहां जाकर छोटी बहू स्याहु माता की सेवा करती है। इससे प्रसन्न स्याहु माता, उसे सात पुत्र और सात बहुओं से समृद्ध होने का का आशीर्वाद देती हैं और घर जाकर अहोई माता का व्रत रखने के लिए कहती हैं। इसके प्रभाव से छोटी बहू का परिवार पुत्र और बहुओं से भर जाता है।

 

अहोई अष्टमी की तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

इस साल अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami Puja Shubh Muhurat) 28 अक्टूबर 2021, गुरुवार को शाम 05:39 से 06:56 तक है। वहीं तारों के निकलने का समय शाम को करीब 06:03 बजे का है।

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By Rudra

Rudra is a social media strategist and a professional content writer with the 5 years of experience. He write content in Hindi as well as in English. He is one of the most essential persons in our team.

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