यदि आप बृहस्पतिवार व्रत कथा PDF / Brihaspativar Vrat Katha PDF in Hindi इंटरनेट पर ढूंढ रहे हैं, तो आपकी खोज पूरी हुई। जैसा कि आप सभी जानते ही होंगे कि गुरु बृहस्पति सभी ग्रहों के गुरु माने जाते हैं। इनकी कृपा अगर किसी व्यक्ति पर हो जाये तो वह हर प्रकार के कुंडली दोष से मुक्त हो जाता है। कहा जाता है कि जिनकी कुंडली में बृहस्पति नीच का हो या वह व्यक्ति गुरु बृहस्पति की महदशा व अन्तर्दशा से अत्यधिक पीड़ित हो तो गुरु बृहस्पति के दिव्य व्रत का पालन करने मात्र से उस व्यक्ति की कुंडली से गुरु सम्बंधित दोष तत्काल ही दूर हो जाते हैं।

यदि किसी के जीवन में विवाह से संबंधित समस्याएँ हैं अथवा विवाह होने में विभिन्न प्रकार की बाधाएँ आ रही हैं, तो आपको भी पूर्ण विधि – विधान के साथ इस लाभकारी गुरुवार के व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए। जैसा कि आपको पता होगा कि किसी भी प्रकार का व्रत बिना व्रत कथा के अपूर्ण माना जाता है अतः इस व्रत का पालन करते हुए बृहस्पतिवार व्रत कथा PDF (Brihaspativar Vrat Katha PDF in Hindi) अवश्य पढ़नी चाहिए व परिवार के सदस्यों को भी स्मरण करनी चाहिए। ऐसा करने से आपको गुरु बृहस्पति देव की विशेष कृपा प्राप्त होगी और जीवन की सभी समस्याओं का निवारण होगा।

बृहस्पतिवार व्रत कथा | Brihaspativar Vrat Katha PDF Details

बृहस्पतिवार व्रत कथा PDF | Brihaspativar Vrat Katha PDF Summary

  • भारतवर्ष में एक प्रतापी और दानी राजा राज्य करता था। वह नित्य गरीबों और ब्राह्मणों की सहायता करता था। यह बात उसकी रानी को अच्छी नहीं लगती थी, वह न ही गरीबों को दान देती, न ही भगवान का पूजन करती थी और राजा को भी दान देने से मना किया करती थी।
  • एक दिन राजा शिकार खेलने वन को गए हुए थे, तो रानी महल में अकेली थी। उसी समय बृहस्पतिदेव साधु वेष में राजा के महल में भिक्षा के लिए गए और भिक्षा माँगी रानी ने भिक्षा देने से इन्कार किया और कहा: हे साधु महाराज मैं तो दान पुण्य से तंग आ गई हूं। मेरा पति सारा धन लुटाते रहिते हैं। मेरी इच्छा है कि हमारा धन नष्ट हो जाए फिर न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।
  • साधु ने कहा: देवी तुम तो बड़ी विचित्र हो। धन, सन्तान तो सभी चाहते हैं। पुत्र और लक्ष्मी तो पापी के घर भी होने चाहिए। यदि तुम्हारे पास अधिक धन है तो भूखों को भोजन दो, प्यासों के लिए प्याऊ बनवाओ, मुसाफिरों के लिए धर्मशालाएं खुलवाओ। जो निर्धन अपनी कुंवारी कन्याओं का विवाह नहीं कर सकते उनका विवाह करा दो। ऐसे और कई काम हैं जिनके करने से तुम्हारा यश लोक-परलोक में फैलेगा।
  • परन्तु रानी पर उपदेश का कोई प्रभाव न पड़ा। वह बोली: महाराज आप मुझे कुछ न समझाएं। मैं ऐसा धन नहीं चाहती जो हर जगह बाँटती फिरूं। साधु ने उत्तर दिया यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो तथास्तु! तुम ऐसा करना कि बृहस्पतिवार को घर लीपकर पीली मिट्‌टी से अपना सिर धोकर स्नान करना, भट्‌टी चढ़ाकर कपड़े धोना, ऐसा करने से आपका सारा धन नष्ट हो जाएगा। इतना कहकर वह साधु महाराज वहाँ से आलोप हो गये।
  • साधु के अनुसार कही बातों को पूरा करते हुए रानी को केवल तीन बृहस्पतिवार ही बीते थे, कि उसकी समस्त धन-संपत्ति नष्ट हो गई। भोजन के लिए राजा का परिवार तरसने लगा। तब एक दिन राजा ने रानी से बोला कि हे रानी, तुम यहीं रहो, मैं दूसरे देश को जाता हूं, क्योंकि यहाँ पर सभी लोग मुझे जानते हैं। इसलिए मैं कोई छोटा कार्य नहीं कर सकता। ऐसा कहकर राजा परदेश चला गया। वहाँ वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता और शहर में बेचता। इस तरह वह अपना जीवन व्यतीत करने लगा। इधर, राजा के परदेश जाते ही रानी और दासी दुःखी रहने लगी।
  • एक बार जब रानी और दासी को सात दिन तक बिना भोजन के रहना पड़ा, तो रानी ने अपनी दासी से कहा: हे दासी! पास ही के नगर में मेरी बहिन रहती है। वह बड़ी धनवान है। तू उसके पास जा और कुछ ले आ, ताकि थोड़ी-बहुत गुजर-बसर हो जाए। दासी रानी की बहिन के पास गई। उस दिन गुरुवार था और रानी की बहिन उस समय बृहस्पतिवार व्रत की कथा सुन रही थी।
  • दासी ने रानी की बहिन को अपनी रानी का संदेश दिया, लेकिन रानी की बड़ी बहिन ने कोई उत्तर नहीं दिया। जब दासी को रानी की बहिन से कोई उत्तर नहीं मिला तो वह बहुत दुःखी हुई और उसे क्रोध भी आया। दासी ने वापस आकर रानी को सारी बात बता दी। सुनकर रानी ने अपने भाग्य को कोसा। उधर, रानी की बहिन ने सोचा कि मेरी बहिन की दासी आई थी, परंतु मैं उससे नहीं बोली, इससे वह बहुत दुःखी हुई होगी।
  • कथा सुनकर और पूजन समाप्त करके वह अपनी बहिन के घर आई और कहने लगी: हे बहिन! मैं बृहस्पतिवार का व्रत कर रही थी। तुम्हारी दासी मेरे घर आई थी परंतु जब तक कथा होती है, तब तक न तो उठते हैं और न ही बोलते हैं, इसलिए मैं नहीं बोली। कहो दासी क्यों गई थी? रानी बोली: बहिन, तुमसे क्या छिपाऊं, हमारे घर में खाने तक को अनाज नहीं था। ऐसा कहते-कहते रानी की आंखें भर आई। उसने दासी समेत पिछले सात दिनों से भूखे रहने तक की बात अपनी बहिन को विस्तार पूर्वक सुना दी।
  • रानी की बहिन बोली: देखो बहिन! भगवान बृहस्पतिदेव सबकी मनोकामना को पूर्ण करते हैं। देखो, शायद तुम्हारे घर में अनाज रखा हो। पहले तो रानी को विश्वास नहीं हुआ पर बहिन के आग्रह करने पर उसने अपनी दासी को अंदर भेजा तो उसे सचमुच अनाज से भरा एक घड़ा मिल गया। यह देखकर दासी को बड़ी हैरानी हुई।
  • दासी रानी से कहने लगी: हे रानी! जब हमको भोजन नहीं मिलता तो हम व्रत ही तो करते हैं, इसलिए क्यों न इनसे व्रत और कथा की विधि पूछ ली जाए, ताकि हम भी व्रत कर सकें। तब रानी ने अपनी बहिन से बृहस्पतिवार व्रत के बारे में पूछा। उसकी बहिन ने बताया, बृहस्पतिवार के व्रत में चने की दाल और मुनक्का से विष्णु भगवान का केले की जड़ में पूजन करें तथा दीपक जलाएं, व्रत कथा सुनें और पीला भोजन ही करें। इससे बृहस्पतिदेव प्रसन्न होते हैं। व्रत और पूजन विधि बताकर रानी की बहिन अपने घर को लौट गई।
  • सात दिन के बाद जब गुरुवार आया, तो रानी और दासी ने व्रत रखा। घुड़साल में जाकर चना और गुड़ लेकर आईं। फिर उससे केले की जड़ तथा विष्णु भगवान का पूजन किया। अब पीला भोजन कहाँ से आए इस बात को लेकर दोनों बहुत दुःखी थे। चूंकि उन्होंने व्रत रखा था, इसलिए बृहस्पतिदेव उनसे प्रसन्न थे। इसलिए वे एक साधारण व्यक्ति का रूप धारण कर दो थालों में सुन्दर पीला भोजन दासी को दे गए। भोजन पाकर दासी प्रसन्न हुई और फिर रानी के साथ मिलकर भोजन ग्रहण किया।
  • उसके बाद वे सभी गुरुवार को व्रत और पूजन करने लगी। बृहस्पति भगवान की कृपा से उनके पास फिर से धन-संपत्ति आ गई, परंतु रानी फिर से पहले की तरह आलस्य करने लगी। तब दासी बोली: देखो रानी! तुम पहले भी इस प्रकार आलस्य करती थी, तुम्हें धन रखने में कष्ट होता था, इस कारण सभी धन नष्ट हो गया और अब जब भगवान बृहस्पति की कृपा से धन मिला है तो तुम्हें फिर से आलस्य होता है।
  • रानी को समझाते हुए दासी कहती है कि बड़ी मुसीबतों के बाद हमने यह धन पाया है, इसलिए हमें दान-पुण्य करना चाहिए, भूखे मनुष्यों को भोजन कराना चाहिए, और धन को शुभ कार्यों में खर्च करना चाहिए, जिससे तुम्हारे कुल का यश बढ़ेगा, स्वर्ग की प्राप्ति होगी और पित्र प्रसन्न होंगे। दासी की बात मानकर रानी अपना धन शुभ कार्यों में खर्च करने लगी, जिससे पूरे नगर में उसका यश फैलने लगा।

बृहस्पति व्रत के लाभ / Benefits of Brihaspatvar Vrat Katha PDF

  • इसे करने से व्यक्ति की वुवह संबंधी समयाओं का निराकरण होता है।
  • इस व्रत को करने से कुंडली में स्थापित दोषों का शीघ्र अंत हो जाता है।
  • जिस व्यक्ति के कुंडली में बृहस्पति नीच का है वह इस व्रत को करने से सभी दोहों से तत्काल मुक्त हो जाता है।
  • गुरु बृहस्पति की कृपा से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है।
  • इस व्रत को करने एवं बृहस्पति कथा को पढ़ने से जीवन के कष्टों से शीघ्र मुक्ति मिलती है।
  • बृहस्पति व्रत का पालन करने से व्यक्ति पर गुरु बृहस्पति देव की अनुकंपा होती है।
  • हर प्रकार की समस्या एवं बाधा का शीघ्र ही अंत होकर आपके जीवन में सुख समृद्धि का आगमन होता है।

बृहस्पतिवार आरती PDF / Brihaspativar Ki Aarti PDF in Hindi :

।। श्री बृहस्पति जी की आरती ।।

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।

छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

तुम पूर्ण परमात्मा,तुम अन्तर्यामी।

जगतपिता जगदीश्वर,तुम सबके स्वामी॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

चरणामृत निज निर्मल,सब पातक हर्ता।

सकल मनोरथ दायक,कृपा करो भर्ता॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

तन, मन, धन अर्पण कर,जो जन शरण पड़े।

प्रभु प्रकट तब होकर,आकर द्वार खड़े॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

दीनदयाल दयानिधि,भक्तन हितकारी।

पाप दोष सब हर्ता,भव बन्धन हारी॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

बृहस्पतिवार व्रत उद्यापन विधि | Brihaspativar Vrat Katha Udyapan Vidhi

  • सर्वप्रथम स्नान आदि कर पीले वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को स्वच्छ करने के पश्चात या अलग से आसन लगाकर उस पर भगवान् विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें।
  • मंदिर या अपने घर के आस पास स्थित केले के वृक्ष की पूजा करें।
  • केले के वृक्ष पर जल चढ़ाकर दीप प्रज्जवलित करें।
  • षोडशोपचार पूजन विधि से विष्णु जी का अर्चना करें|
  • घर आकर मंदिर के समक्ष आसान लगाकर कथा करें।
  • कथा सम्पूर्ण होने पर देशी घी के दीपक से आरती करें व आशीर्वाद ग्रहण करें।

How to download Brihaspativar Vrat Katha PDF in Hindi ?

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By Lakshmi

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