दुर्गासप्तशती पाठ सात सौ श्लोकों को एकत्रित करके बनाया गया एक देवी उपासना ग्रंथ है जिसके रोजाना पाठ करने से माँ दुर्गा आपके सारे दुखों को दूर करके उनके जीवन को सुख और समृद्धि से भर देती है।

नवरात्रि की कालावधि में देवी पूजन के साथ उपासना स्वरूप देवी के स्तोत्र, सहस्रनाम, देवी माहात्म्य इत्यादि के यथाशक्ति पाठ और पाठ समाप्ति के दिन विशेष रूप से हवन करते हैं। श्री दुर्गाजीका एक नाम ‘चंडी’ भी है।

दुर्गा सप्तशती पाठ करने की विधि

  • पाठ करते समय प्रथम आचमन करते हैं ।
  • तद उपरांत पोथी का पूजन करते है ।
  • अब श्री दुर्गासप्तशती का पठन करते हैं ।
  • पाठ के उपरांत पोथी पर पुष्प अर्पित करते हैं ।
  • उपरांत आरती करते हैं।

कवच पठन

इसमें देवताओं द्वारा हमारे शरीर की रक्षा होने हेतु प्रर्थना होती है। अनेक विध मंत्रों की सहायता से मानवीय देह पर मंत्र कवचों की निर्मिति करना संभव है। ये कवच स्थूल कवच से अधिक शक्तिशाली होते हैं। स्थूल कवच बंदूक की गोली समान स्थूल आयुधों से रक्षा करते हैं तथा सूक्ष्म कवच स्थूल एवं सूक्ष्म अनिष्ट शक्तियों से रक्षा करते हैं। दुर्गाकवच, लक्ष्मीकवच, महाकालीकवच आदि के पठन से शत्रु तथा अनिष्ट शक्तियों से संरक्षण में सहायता मिलती है|

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By Rudra

Rudra is a social media strategist and a professional content writer with the 5 years of experience. He write content in Hindi as well as in English. He is one of the most essential persons in our team.

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