गौ माता चालीसा | Gau Chalisa PDF in Hindi

Gau Chalisa PDF

यदि आप गौ माता चालीसा / Gau Chalisa PDF इंटरनेट पर ढूंढ रहे हैं, तो इस आर्टिकल पर आपका स्वागत है। सनातन धर्म में गऊ माता को अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है, कि गऊ माता की देह में ३३ कोटि देवी – देवता निवास करते हैं। गौ माता के महत्व को समस्त संसार के सामने प्रदर्शित करने के लिए ही भगवान् श्री विष्णु ने श्री कृष्ण अवतार के समस्य गौचारण लीला की।

वेद ग्रंथों के साथ – साथ वैदिक ज्योतिष में भी गौ माता को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। ज्योतिष विद्द्वान कहते हैं कि यदि किसी जातक की कुंडली में भीषण से भीषण दोष भी हो तो यदि वह गौ माता की सेवा पूरी श्रद्धा व भक्ति से करता है तो उसकी कुंडली में उत्पन्न होने वाले विभिन्न प्रकार के दोषों का शमन हो जाता है। आप नीचे दिए गए डाउनलोड लिंक से गौ माता चालीसा / Gau Chalisa PDF डाउनलोड करके गौ माता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

गौ माता चालीसा | Gau Chalisa PDF Details

गौ माता चालीसा | Gau Chalisa Hindi PDF Summary

।। दोहा ।।

श्री गणेश को सुमिर के, शारद शीश नवाय ।

गौ माँ की महिमा कहूँ, कंठ विराजो आय ।।

मंदमती मैं मात गौ, मुझको तनिक न ज्ञान ।

कृपा करो हे नंदिनी, महिमा करूँ बखान ।।

।। चौपाई।।

जय जय जय जय जय गौ माता,

कामधेनु सुख शान्ति प्रदाता !!१!!

मात सुरभि हो जग कल्यानी,

ऋषि मुनियों ने कथा बखानी !!२!!

तुम ही हो हम सबकी मइया,

भवसागर की पार लगइया !!३!!

देवन आई विपत करारी,

तुमने माता की रखवारी !!४!!

ऋषि मुनियन पर दानव धावा,

सब मिल तुमहिं पुकार लगावा !!५!!

व्याकुल होकर गंगा माई,

आकर पास गुहार लगाई !!६!!

गंगा को माँ दिया निवासा,

आपहिं लक्ष्मी आई पासा !!७!!

लक्ष्मी को भी तुम अपनाई,

सबके जीवन मात बचाई !!८!!

तेंतिस कोटि देव-मुनि आये,

सबहीं माता आप बचाये !!९!!

तुमने सबकी रक्षा कीन्हीं,

असुर ग्रास हर जीवन दीन्हीं !!१०!!

माता तुम हो दिव्य स्वरूपा,

तव महिमा सब गायें भूपा !!११!!

देव दनुज मिल मथे नदीशा,

पाये चौदह रतन मनीषा !!१२!!

सागर को मिल देव मथाये,

कामधेनु रत्नहिं तब पाये !!१३!!

कामधेनु के पांच प्रकारा,

सेवा से जायें भव पारा !!१४!!

सुभद्रा नंदा सुरभि सुशीला,

बहुला धेनु काम की लीला !!१५!!

जो जन सिर गोधूलि लगायें,

ताके पाप आप कट जायें !!१६!!

गो चरणन मा तीर्थ निवासा,

गौ-भक्ति सम नहीं उपवासा !!१७!!

गौ सेवा है मोक्ष कि सीढी,

धन बल यश पावहिं सब पीढ़ी !!१८ !!

विद्या लक्ष्मी आवहिं पासा,

कामधेनु कर जहाँ निवासा !!१९!!

भोलेनाथ श्राप जब पाये ,

सीधे वह गोलोक सिधाये !!२०!!

शिव करन सुरभि की स्तुति लागे,

परिकरमा कर माँ के आगे !!२१!!

हाँथ जोड़ शिव बात बताई,

तपती देह श्राप से माई !!२२!!

तोरी शरण मात मैं आया,

शीतल कर दो मेरी काया !!२३!!

सुरभि देह में प्रविशे शंकर,

जग कोलाहल मचा भयंकर !!२४!!

तब सबहिं देव मिल स्तुति गाये,

पता पाय गोलोक सिधाये !!२५!!

सूर्य समान सुरभि सुत देखा,

नील नाम था तेज विशेषा !!२६!!

गो सेवक थे कृष्ण मुरारी,

जिनकी महिमा सबसे न्यारी !!२७!!

कान्हा वन में गाय चराते,

दूध दही पी माखन खाते !!२८!!

जबहिं कृष्ण बाँसुरी बजायें,

बछड़े गाय लौट आ जायें !!२९!!

जिस घर हो माँ तेरा वासा,

दुःख पीड़ा किम आवहिं पासा !!३०!!

हो जहँ कामधेनु की पूजा,

पुण्य नहीं इससे बड़ दूजा !!३१!!

माता तुमने ऋषि मुनि तारे,

देव मनुज के भाग्य सँवारे !!३२!!

वेद पुराणों में तव गाथा,

युगों युगों से है तव साथा !!३३!!

तुमहिं मनुज के भाग्य सँवारे,

अंत काल वैतरिणी तारे !!३४!!

तव महिमा किम गाऊँ माते,

तुममे चारो धाम समाते !!३५!!

पंचगव्य की महिमा न्यारी,

तुमसे ही है दुनिया सारी !!३६!!

प्रातकाल जो दर्शन पायें ,

बिगड़े काज आप बन जायें !!३७!!

हाँथ जोड़ जो शीश नवाये,

बुरी बला से मात बचाये !!३८!!

जो जन गौ चालीसा गाये,

सुख सम्पति ताके घर आये !!३९!!

‘चेतन’ है माँ तेरा दासा,

मात ह्रदय में करो निवासा !!४०!!

।। दोहा ।।

गौ चालीसा जो पढ़े, नित्य नियम उठ प्रात !

ज्ञान संग धन यश बढ़े, कष्ट हरे गौ मात !!

गौ वंदन जो कर लिये, पूरण चारो धाम !

तरणि तीर कान्हा मिले, पाये सरयू राम !!

गौ माता की आरती | Gau Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi

ॐ जय जय गौमाता, मैया जय जय गौमाता

जो कोई तुमको ध्याता, त्रिभुवन सुख पाता

 

सुख समृद्धि प्रदायनी, गौ की कृपा मिले

जो करे गौ की सेवा, पल में विपत्ति टले

 

आयु ओज विकासिनी, जन जन की माई

शत्रु मित्र सुत जाने, सब की सुख दाई

 

सुर सौभाग्य विधायिनी, अमृती दुग्ध दियो

अखिल विश्व नर नारी, शिव अभिषेक कियो

 

ममतामयी मन भाविनी, तुम ही जग माता

जग की पालनहारी, कामधेनु माता

 

संकट रोग विनाशिनी, सुर महिमा गाई

गौ शाला की सेवा, संतन मन भाई

 

गौ मां की रक्षा हित, हरी अवतार लियो

गौ पालक गौपाला, शुभ संदेश दियो

 

श्री गौमाता की आरती, जो कोई सुत गावे

पदम् कहत वे तरणी, भव से तर जावे

गोपाष्टमी पूजन मंत्र | गौ पूजन मंत्र | Gau Mata Stotram

लक्ष्मीर्या लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता।

घृतं वहति यज्ञार्थ मम पापं व्यपोहतु।।

घृतक्षीरप्रदा गावो घृतयोन्यो घृतोद्भवाः।

घृतनद्यो घृतावर्तास्ता मे सन्तु सदा गृहे॥

घृतं मे हृदये नित्यं घृतं नाभ्यां प्रतिष्ठितम्।

घृतं सर्वेषु गात्रेषु घृतं मे मनसि स्थितम्॥

गावो ममाग्रतो नित्यं गावः पृष्ठत एव च।

गावो मे सर्वतश्चैव गवां मध्ये वसाम्यहम्॥

सुरूपा बहुरूपाश्च विश्वरूपाश्च मातरः।

गावो मामुपतिष्ठन्तामिति नित्यं प्रकीर्तयेत्॥

यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजङ्गमम्।

तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥

सर्वकामदुधे देवि सर्वतीर्थीभिषेचिनि।

पावने सुरभि श्रेष्ठे देवि तुभ्यं नमोस्तुते ॥

 

गौ माता चालीसा / Gau Chalisa PDF डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए हुए लिंक अपर क्लिक करें –

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