यहाँ आप करवा चौथ व्रत कथा pdf download कर सकते हैं। सनातन धर्म में करवा चौथ व्रत को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। धर्म शास्त्रों में करवा चौथ व्रत की महिमा का वर्णन अनेक स्थानों पर मिलता है। करवा चौथ के दिन सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत का कठोर पालन करती हैं। करवाचौथ पूजन विधि – विधान से किया जाता है। यह व्रत रात्रिकाल में चन्द्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के पश्चात संपन्न किया जाता है।

अर्घ्य अर्पित करने से पूर्व सभी स्त्रियाँ करवा चौथ माता का पूजन करती हैं तथा करवा चौथ कथा का श्रवण करती हैं। इस व्रत में व्रत कथा का बहुत अधिक महत्व है। माना जाता है कि जब तक पूजा के समय करवा चौथ की कहानी न सुनाई व सुनी जाए, तब तक यह व्रत सफल नहीं होता है। यह कथा हमें करवाचौथ व्रत के महत्व के संदर्भ में बताती है।

हमारी ओर से आप सभी को करवा चौथ के पावन अवसर की शुभकामनायें ।

करवा चौथ व्रत कथा 2021 / Karwa Chauth Vrat Katha Book in Hindi PDF

करवा चौथ व्रत की पौराणिक कथा / Karva Chauth Vrat Katha PDF

एक ब्राह्मण के सात पुत्र थे और वीरावती नाम की इकलौती पुत्री थी। सात भाइयों की अकेली बहन होने के कारण वीरावती सभी भाइयों की लाडली थी और उसे सभी भाई जान से बढ़कर प्रेम करते थे. कुछ समय बाद वीरावती का विवाह किसी ब्राह्मण युवक से हो गया। विवाह के बाद वीरावती मायके आई और फिर उसने अपनी भाभियों के साथ करवाचौथ का व्रत रखा लेकिन शाम होते-होते वह भूख से व्याकुल हो उठी।

सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। लेकिन चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है। वीरावती की ये हालत उसके भाइयों से देखी नहीं गई और फिर एक भाई ने पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा लगा की चांद निकल आया है। फिर एक भाई ने आकर वीरावती को कहा कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो।

बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखा और उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ गई।उसने जैसे ही पहला टुकड़ा मुंह में डाला है तो उसे छींक आ गई। दूसरा टुकड़ा डाला तो उसमें बाल निकल आया। इसके बाद उसने जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश की तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिल गया। उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं।

एक बार इंद्र देव की पत्नी इंद्राणी करवाचौथ के दिन धरती पर आईं और वीरावती उनके पास गई और अपने पति की रक्षा के लिए प्रार्थना की। देवी इंद्राणी ने वीरावती को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करवाचौथ का व्रत करने के लिए कहा। इस बार वीरावती पूरी श्रद्धा से करवाचौथ का व्रत रखा। उसकी श्रद्धा और भक्ति देख कर भगवान प्रसन्न हो गए और उन्होंनें वीरावती सदासुहागन का आशीर्वाद देते हुए उसके पति को जीवित कर दिया। इसके बाद से महिलाओं का करवाचौथ व्रत पर अटूट विश्वास होने लगा।

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By Rudra

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