इस लेख में आप माता कूष्मांडा व्रत कथा PDF के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें जानेंगे। पुरानी मान्यताओं के आधार पर माँ कूष्मांडा का अर्थ ‘कुम्हड़ा’ होता है तथा माँ कूष्मांडा का बाहन सिंह है।इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है।हमारे हिंदू समाज में ‘कुम्हड़े’ का अर्थ ‘कूष्मांडा’ होता है इसलिय माँ को कूष्मांडा नाम से बुलाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता कूष्मांडा सूर्यमंडल के अंदर निवास करती हैं। जब संसार का अस्तित्व नहीं था तब देवी ‘कूष्मांडा’ ने ब्रह्मांड की रचना की थी।अर्थात् इन्ही को ‘आदिस्वरूपा’(आदिशक्ति) भी कहा जाता है अतः इनको ‘अष्टभुजा’ देवी भी कहा जाता है।

हिंदू समाज में कही-कही पर तीसरी और चौथी नवरात्रि एक ही दिन मनायी जाती है इसलिय इस बार की नवरात्रि 9 की बजाय 8 दिन की है अतः ‘तीसरी’ और ‘चौथी’ नवरात्रि इस बार एक ही दिन होगी अर्थात् 9 अक्टूबर को ही है। 9 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 38 मिनट तक ही तृतीया तिथि रहेगी इसके बाद चतुर्थ तिथि आरम्भ हो जाएगी अतः इस दिन माता चंद्रघंटा और माता कूष्मांडा दोनो की पूजा की जाएगी।

माँ कुष्मांडा देवी कथा PDF | Maa Kushmanda Devi Katha PDF in Hindi

कूष्माण्डा देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है।

इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कूष्माण्ड कहते हैं इसलिए इस देवी को कूष्माण्डा। इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है।

अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन इस देवी की पूजा-आराधना करना चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है।

विधि-विधान से पूजा करने पर भक्त को कम समय में ही कृपा का सूक्ष्म भाव अनुभव होने लगता है। ये देवी आधियों-व्याधियों से मुक्त करती हैं और उसे सुख-समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं। अंततः इस देवी की उपासना में भक्तों को सदैव तत्पर रहना चाहिए।

कूष्माण्डा देवी पूजा विधि PDF | Maa Kushmunda Devi Pooja Vidhi PDF in Hindi

देवी कुष्मांडा की सम्पूर्ण पूजा विधि इस प्रकार है –

आइए जानते हैं कैसा है मां का यह स्‍वरूप, कैसे करते हैं माँ की आराधना और किन मंत्रो द्वारा करते हैं माँ की पूजा।

  • इस दिन भी आप सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी-देवता की पूजा करें।
  • फिर देवी की प्रतिमा के दोनो ओर उपस्थित देवी-देवताओं की पूजा करें।
  • इसके बाद देवी कुष्मांडा की पूजा करें।
  • अब देवी को लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चूड़ी भी अर्पित करना चाहिए।
  • पूजा शुरु करने से पहले हाथों में फूल लेकर एक बार इस मंत्र का जाप करें- ‘सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे’।
  • इसके बाद शप्‍तशती मंत्र, उपासन मंत्र, दुर्गा कवच और अंत में आरती करें तथा देवी कवच को पांच बार पढ़ना चाहिए।
  • सबसे पहले कलश की पूजा कर माता कूष्मांडा को नमन करें।
  • इस दिन पूजा में बैठने के लिए हरे रंग के आसन का प्रयोग करना चाहिए।
  • अंत माता को प्रसन्न करने के लिय माता के इस मंत्र का जाप करना चाहिए-: सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
    दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥
  • इसका सरलतम मंत्र यह है- ‘।।ॐ कूष्माण्डायै नम:।।’

मां कूष्मांडा की उपासना का मंत्र-

देवी कूष्मांडा की उपासना इस मंत्र के उच्चारण से की जाती है- ‘कुष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:’

‘वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥
मंत्र: या देवि सर्वभूतेषू सृष्टि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:’

अर्थ-: ‘हे मां! सर्वत्र विराजमान और कूष्माण्डा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे मां, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

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By Rudra

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