सत्यनारायण भगवान की पूजा को हिंदू धर्म में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है। सत्यनारायण भगवान को भगवान विष्णु का ही एक स्वरूप माना जाता है। सत्यनारायण नाम में सत्य का अर्थ है “सत्य” और नारायण का अर्थ है “उच्चतम” इसलिए सत्यनारायण नाम का सम्पूर्ण अर्थ है “उच्चतम जो सत्य का अवतार है”।

हिन्दू धर्म में पूजा एवं व्रतों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। स्वास्थ्य, धन, समृद्धि, एवं  शिक्षा के दिव्य आशीर्वाद के लिए हिंदू धर्म में पूरे मन से भगवान का पूजन एवं ध्यान करते हैं और भगवान श्री सत्यनारायण का व्रत भी करते हैं। श्री सत्यानारायण भगवान की पूजा सभी तरह की समस्याओं, बीमारी एवं व्यवसाय या करियर संबंधी समस्याओं का एकमात्र सुलभ निवारण है।

सत्यनारायण पूजा विधि मंत्र सहित PDF Summary

कार्यक्षेत्र में वृद्धि एवं सफलता प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप सत्यनारायण जी का पूजन एवं व्रत विधिपूर्वक अवश्य करना चाहिए। सामाजिक कार्यों जैसे विवाह, घर में होने वाले समारोह, बच्चों का नामकरण इत्यादि के अवसर पर सत्यनारायण भगवान की कथा करवाना अत्यधिक शुभ कर्म माना जाता है।

इसीलिए सनातन हिन्दू धर्म में सत्यनारायण व्रत कथा का सबसे अधिक महत्व माना गया है। यह कथा सर्वाधिक प्रतिष्ठित व्रत कथा के रूप में मानी जाती है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह कथा भगवान विष्णु के सत्य के स्वरूप की कथा है। यह कथा अत्यंत ही लाभकारी एवं कल्याणकारी है। भगवान सत्यनारायन का आशीर्वाद पाने के लिए उनका पूजन पूरी विधि – विधान एवं मंत्रों द्वारा करना चाहिए।

Satyanarayan Puja Vidhi PDF Details | सत्यनारायण पूजा विधि मंत्र सहित PDF

सत्यनारायण पूजा विधि मंत्र सहित PDF | Satyanarayan Puja Vidhi in Hindi PDF

श्री सत्यनारायण व्रत-पूजनकर्ता पूर्णिमा या संक्रांति के दिन स्नान करके कोरे अथवा धुले हुए शुद्ध वस्त्र पहनें, माथे पर तिलक लगाएँ और शुभ मुहूर्त में पूजन शुरू करें। इस हेतु शुभ आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके सत्यनारायण भगवान का पूजन करें। इसके पश्चात्‌ सत्यनारायण व्रत कथा का वाचन अथवा श्रवण करें।

अपनी जानकारी हेतु पूजन शुरू करने के पूर्व प्रस्तुत पद्धति एक बार जरूर पढ़ लें।

 

पवित्रकरण :

बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ की अनामिका से निम्न मंत्र बोलते हुए अपने ऊपर एवं पूजन सामग्री पर जल छिड़कें-

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा ।

यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः ॥

पुनः पुण्डरीकाक्षं, पुनः पुण्डरीकाक्षं, पुनः पुण्डरीकाक्षं ।

 

आसन :

निम्न मंत्र से अपने आसन पर उपरोक्त तरह से जल छिड़कें-

ॐ पृथ्वी त्वया घता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता ।

त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु च आसनम्‌ ॥

 

ग्रंथि बंधन :

यदि यजमान सपत्नीक बैठ रहे हों तो निम्न मंत्र के पाठ से ग्रंथि बंधन या गठजोड़ा करें-

ॐ यदाबध्नन दाक्षायणा हिरण्य(गुं)शतानीकाय सुमनस्यमानाः ।

तन्म आ बन्धामि शत शारदायायुष्यंजरदष्टियर्थासम्‌ ॥

 

आचमन :

इसके बाद दाहिने हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें व तीन बार कहें-

  1. ॐ केशवाय नमः स्वाहा,
  2. ॐ नारायणाय नमः स्वाहा,3. माधवाय नमः स्वाहा ।

यह बोलकर हाथ धो लें-

ॐ गोविन्दाय नमः हस्तं प्रक्षालयामि ।

यावत्कर्मसमाप्तिः स्यात तावत्वं सुस्थिर भव ॥

(पूजन कर प्रणाम करें)

 

स्वस्ति-वाचन :

निम्न मंगल मंत्र बोलें-

ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।

स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥

द्यौः शांतिः अंतरिक्षगुं शांतिः पृथिवी शांतिरापः

शांतिरोषधयः शांतिः। वनस्पतयः शांतिर्विश्वे देवाः

शांतिर्ब्रह्म शांतिः सर्वगुं शांतिः शांतिरेव शांति सा

मा शांतिरेधि। यतो यतः समिहसे ततो नो अभयं कुरु ।

शंन्नः कुरु प्राजाभ्यो अभयं नः पशुभ्यः। सुशांतिर्भवतु ॥

ॐ सिद्धि बुद्धि सहिताय श्री मन्ममहागणाधिपतये नमः ॥

नोट : पूजन शुरू करने के पूर्व पूजन की समस्त सामग्री व्यवस्थित रूप से पूजा-स्थल पर रख लें। पंचामृत में तुलसी की पत्तियाँ मिलाएँ। पंजीरी का प्रसाद बनाएँ। श्री सत्यनारायण भगवान की तस्वीर(फोटो) को एक चौकी पर कोरा लाल वस्त्र बिछाकर उस पर स्थापित करें। चौकी को चारों तरफ से केले के पत्तों(खंबे) से सजाएँ। गणेश एवं अंबिका की मूर्ति के अभाव में दो सुपारियों को धोकर, पृथक-पृथक नाड़ा बाँधकर कुंकु लगाकर गणेशजी के भाव से पाटे पर स्थापित करें व उसके दाहिनी ओर अंबिका के भाव से दूसरी सुपारी स्थापना हेतु रखें।

 

संकल्प :

अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, अक्षत व द्रव्य लेकर श्रीसत्यनारायण भगवान आदि के पूजन का संकल्प करें-

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य

विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य श्री ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयेपरार्धे

श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलि-युगे कलि प्रथम चरणे जंबूद्वीपे भरतखंडे भारतवर्ष

आर्य्यावर्तेक देशांतर्गत (अमुक) क्षेत्रे/नगरे/ग्रामे (अमुक) संवत्सरे, (अमुक)ऋतौ (अमुक)

मासानाममासे (अमुक) मासे (अमुक)तिथौ (अमुक)वासरे (अमुक)नक्षत्रे (अमुक)राशि सर्व गृहेषु यथा यथा राशि स्थितेषु सत्सु एवं

गृहगुणगण विशेषण विशिष्ठायां शुभ पुण्यतिथौ(अमुक) गोत्रोत्पन्न(अमुक)नाम ( शर्मा/ वर्मा/ गुप्तो दासोऽहम्‌ अहं) ममअस्मिन कायिक वाचिक मानसिक ज्ञातज्ञात सकल दोष परिहारार्थं श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त फल प्राप्त्यर्थं आरोग्यैश्वर्य दीर्घायुः विपुल धन धान्य समृद्धर्थं पुत्र-पौत्रादि अभिवृद्धियर्थं व्यापारे उत्तरोत्तरलाभार्थं सुपुत्र पौत्रादि बान्धवस्य सहित श्रीसत्यनारायण,गणेश-अम्बिका आदि पूजनम्‌ च करिष्ये/ करिष्यामि ।

How to download सत्यनारायण पूजा विधि मंत्र सहित PDF ?

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By Lakshmi

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